कविकुंभ
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मैनेजर पांडेय की आलोचना
हर पुनर्पाठ में ताज़ा चीनुआ अचेबे
अपनी तमतमाती कविताओं में कुम्भज
अकेले-अकेले जूझते रहे कवि शील
लोक का ऋणी हूं- श्यामसुंदर दुबे
कविताएं लिखता हूं कि लोग प्यार करें
हमारे देश में सिटी ऑफ लिटरेचर!
कविता का सशक्त माध्यम गोष्ठियां
लेखक संगठित नहीं हुए, तो हमले
तुलसीदास की परंपरा के हैं प्रेमचंद

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